बालिका पूर्णिमा का हुआ अंतिम दत्तक ग्रहण, बालिका को मिला परिवार।

बालिका पूर्णिमा का हुआ अंतिम दत्तक ग्रहण, बालिका को मिला परिवार।
*अपर जिला मजिस्ट्रेट एल.के. पांडे ने जारी किया आदेश*
माह अक्टूबर 2025 में लावारिस अवस्था में मिली बालिका को जिला प्रशासन महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण में उपचार उपरांत सेवा भारती मातृछाया में प्रवेश दिया गया। इसके पश्चात बालिका को पुणे निवासी दंपति द्वारा रिजर्व किया गया और प्री-एडॉप्शन की कार्रवाई की गई। प्री-एडॉप्शन की कार्रवाई के पश्चात अपर जिला मजिस्ट्रेट एल.के. पांडे के निर्देशन में संभावित माता-पिता को लगभग 02 माह बाद साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। साक्षात्कार में अपर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा संभावित माता-पिता से बात की गई, बालिका को देखा गया, स्वास्थ्य के संबंध में चर्चा की गई बालिका के विकास, टीकाकरण आदि के संबंध में जानकारी ली गई। जानकारी से के बालिका के प्रति अनुराग और आत्मीयता को देखकर संतुष्ट होने जारी किया गया। संतुष्ट होने पर एवं संभावित माता-पिता पर बालिका का अंतिम दत्तकग्रहण आदेश आदेश जारी करते समय अपर कलेक्टर द्वारा संभावित दंपति को दत्तकग्रहण आदेश सौंपते हुए शुभकामनाएं दी गई और जिला प्रशासन की ओर से मेरी बेटी मेरा अभिमान का स्मृति चिन्ह प्रदान कर संभावित दंपति से आशा की गई के बालिका की उचित संरक्षण पोषण हेतु सदैव तत्पर रहेंगे।
दत्तकग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी अंजू तोमर, बाल संरक्षण अधिकारी अजय सक्सेना, सेवा भारती मात्रछाया से सचिव संतोष गुप्ता उपस्थित रहे। जिला कार्यक्रम अधिकारी अंजू तोमर द्वारा बताया गया की दत्तक ग्रहण की एकमात्र वैधानिक प्रक्रिया कारा के माध्यम से ही संभव है, अन्य किसी माध्यम दत्तकग्रहण नहीं करना चाहिए। बाल संरक्षण अधिकारी अजय सक्सेना के द्वारा बताया गया की संभावित माता-पिता द्वारा 2022 में दत्तक ग्रहण हेतु पंजीकृत किया गया था, और 2026 में उनकी वेटिंग क्लियर हुई उसके बाद जब बालिका का अंतिम दत्तकग्रहण आदेश जारी हुआ संभावित माता-पिता अत्यंत खुश थे, आंखों में खुशी के आंसू हैं और हाथों में बहुत लंबे समय का तक धैर्य का फल उनकी बेटी थी। दंपति बालिका को पाकर बहुत खुश हैं।




