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आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से नहीं आने वाले बच्चों के परिवार से संपर्क कर समझाकर लाने करें प्रयास – कलेक्टर।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से नहीं आने वाले बच्चों के परिवार से संपर्क कर समझाकर लाने करें प्रयास – कलेक्टर।

*पोषण अभियान, पोस्को एक्ट एवं विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक संपन्न*

कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें कलेक्टर ने पोषण अभियान, पोस्को एक्ट तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में डिप्टी कलेक्टर, महिला बाल विकास अधिकारी, सीएमएचओ, सीडीपीओ सहित सभी सेक्टर सुपरवाइजर उपस्थित रहे। इस दौरान कलेक्टर ने पूरक पोषण आहार, आंगनबाड़ी बच्चों के पंजीकरण, पोषण पुनर्वास केंद्र तथा अन्य योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की और सुधार के लिए कड़े निर्देश जारी किए।
कलेक्टर ने सबसे पहले पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता पर जोर दिया। उन्होंने सभी स्थानों पर वितरित किए जा रहे आहारों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। सेम-मेम में बच्चों के पंजीकरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने असंतोष व्यक्त किया और तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाए, ताकि उनका समुचित उपचार हो सके।
आंगनबाड़ी केंद्रों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जो बच्चे नियमित रूप से केंद्रों पर नहीं आ रहे, उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें समझाकर लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने आंगनबाड़ी की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया कि यदि माता-पिता कहीं यात्रा पर जा रहे हैं, तो बच्चे को कुछ समय के लिए आंगनबाड़ी में छोड़ दें। वहां बच्चा भोजन करे, अन्य बच्चों के साथ खेले-कूदे और कुछ सीखे। यही सरकार की मंशा है और सभी अधिकारी इसी दिशा में प्रयास करें। इस दृष्टिकोण से आंगनबाड़ी को समुदाय का अभिन्न अंग बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की प्रगति की समीक्षा में कलेक्टर ने लक्ष्यों की पूर्ति पर नाराजगी जताई। उन्होंने पहली डिलीवरी और दूसरी डिलीवरी की पेंडेंसी की जांच की, जो संतोषजनक नहीं पाई गई। महिला बाल विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वे तत्काल ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित करें और प्रगति में तेजी लाएं। इसी प्रकार, परियोजना अधिकारियों को ब्लॉक स्तर पर सभी कार्यों की मॉनिटरिंग करने और सुधारात्मक कदम उठाने के आदेश दिए गए।
कलेक्टर ने तकनीकी समस्याओं पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि शासन की योजनाओं का लाभ तकनीकी खामियों के कारण हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पा रहा, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। महिला बाल विकास अधिकारी को हर सेक्टर अधिकारी से संपर्क कर समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत बालिकाओं के ई-केवाईसी और समग्र सत्यापन की समीक्षा की गई। जो बालिकाएं छूट गई हैं, उन्हें चिन्हित कर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए।
सुपरवाइजर्स की भूमिका पर बल देते हुए कलेक्टर ने कहा कि वे अपना पर्यवेक्षण मजबूती से करें। कार्यकर्ताओं के पास जाकर उनकी परेशानियों का निवारण करें और उन्हें पूर्ण सहयोग दें। आधार कार्ड तथा समग्र आईडी की समस्याओं से यदि हितग्राही योजनाओं से वंचित हो रहे हैं, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संबंधित सचिवों से समन्वय स्थापित कर इसका निराकरण करें। सीडीपीओ को निरंतर मॉनिटरिंग करने और जनपद पंचायत के सीईओ से समन्वय कर समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए।

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