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मिशन शक्ति संकल्प के घटक जिला हब फॉर इंपोवरमेंट ऑफ वुमन के तहत जेंडर संवेदीकरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

मिशन शक्ति संकल्प के घटक जिला हब फॉर इंपोवरमेंट ऑफ वुमन के तहत जेंडर संवेदीकरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

कलेक्टर भिण्ड के मार्गदर्शन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशन में मिशन शक्ति संकल्प के घटक जिला हब फॉर इंपोवरमेंट ऑफ वुमन के तहत शासकीय एम.जे.एस महाविद्यालय में जेंडर संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.ए. शर्मा, राष्ट्रीय सेवा योजना की जिला संगठक प्रोफेसर अनिता बंसल, प्रोफेसर मोहित कुमार दुबे प्रोफेसर रविकांत सिंह, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह राठौड़ एवं राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता राहुल राजपूत और महाविद्यालय के स्नातक स्नातकोत्तर कक्षाओं की बड़ी संख्या में छात्राएं और छात्र भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया की 2013 के पहले विशाखा गाइडलाइन प्रचलित थी जिसका उद्देश्य भी कार्यस्थल पर महिलाओं का संरक्षण था। इस अधिनियम के तहत हर वह कार्यालय जहां पर 10 और 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं अथवा पद स्वीकृत हैं किंतु कार्यरत नहीं हैं, वहां पर महिलाओं के संरक्षण के लिए अधिनियम के तहत आंतरिक परिवार समिति गठन किए जाने का प्रावधान है। आंतरिक परिवार समिति में उस कार्यालय की वरिष्ठ महिला कर्मचारी पीठासीन अधिकारी होगी, एक कार्यालय से बाहर का अशासकीय सदस्य होगा, दो अन्य सदस्य होंगे जिनमें महिला होना आवश्यक है पूरी समिति में आधे सदस्य महिला होंगे। इसी तरह से ऐसे कार्यालय जिनमें शिकायत नियोक्ता अधिकारी की है अथवा जहां 10 कर्मचारियों से कम लोग हैं वहां पर शिकायत निराकरण के लिए जिला स्तर पर स्थानीय परिवाद समिति गठन किए जाने का प्रावधान है कोई भी व्यथित महिला घटना के तीन माह बाद तक लिखित में आंतरिक परिवार समिति अथवा स्थानीय परिवार समिति को शिकायत कर सकती है, इन समितियों का कार्यकाल गठन होने के दिनांक से 3 वर्ष का होता है। आगे अवगत कराया गया कि हर कार्यालय प्रमुख की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने कार्यालय में आंतरिक परिवार समिति गठित करें। उक्त अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय नोडल अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को अधिनियम में नामित किया गया है। यदि कोई कार्यालय प्रमुख इस प्रकार की समिति घटित करने में विफल रहता है तो उस पर ₹50 हजार तक का जुर्माना अधिरूपित किया जा सकता है। उक्त अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं को कार्यकाल सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है जिससे वह कार्य स्थल पर अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें और यह अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कारगर पहल है। कार्यशाला में सभी छात्रों को अधिनियम से संबंधित प्रेजेंटेशन और प्रशिक्षण सामग्री प्रदान की गई।

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