मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा भिण्ड में “सिलसिला” के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ आयोजित”

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा भिण्ड में “सिलसिला” के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ आयोजित”
भिंड. मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, भिण्ड द्वारा सिलसिला के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन 1 मार्च 2026 को वीरेंद्र मांगलिक भवन, भिण्ड में ज़िला समन्वयक हसरत हयात के सहयोग से किया गया।
ज़िला भिण्ड में आयोजित सिलसिला के लिए मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी का यह सतत प्रयास रहा है कि उर्दू भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को प्रदेश के प्रत्येक ज़िले तक पहुँचाया जाए एवं स्थानीय रचनाकारों को सशक्त मंच प्रदान किया जाए। भिण्ड में “सिलसिला” के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान एवं रचना पाठ इसी उद्देश्य की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है।
भिण्ड जैसे जनपद में उर्दू शायरी की जीवंत परंपरा का परिचय हमें यह विश्वास दिलाता है कि साहित्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी अपनी पूरी रचनात्मक ऊर्जा के साथ विकसित हो रहा है।
भिण्ड ज़िले के समन्वयक हसरत हयात ने बताया कि सिलसिला के तहत दोपहर 1:00 बजे व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन शुरू हुआ जिसकी अध्यक्षता भिण्ड के वरिष्ठ शायर महावीर तन्हा ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में संतोष अवस्थी “अंश” मंच पर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महावीर तन्हा ने “भिण्ड में उर्दू शायरी का परिदृश्य” विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा ग़ज़ल फ़ारसी से उर्दू में आई, उसके बाद उर्दू में ग़ज़ल ने बहुत ऊँचाइयाँ हासिल कीं और भारत ने ग़ज़ल के बड़े बड़े शायर दुनिया को दिये। उसी क्रम में भिण्ड में भी कई अच्छे शायर हुए जिन्होंने अपनी शायरी से भिण्ड का नाम रौशन किया। उन शायरों में हुब्ब लाल रा’द, ओम प्रभाकर अवस्थी, सागर ज़ैदी, क़ाज़ी तन्वीर एवं राजेश मधुकर विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं
रचना पाठ में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनमें अंजुम मनोहर, राईन अजनबी, राजेश मधुकर, ज़ुबेर कुरैशी, चेतना शर्मा, प्रदीप वाजपेयी ‘युवराज’, अब्दुल हमीद, अताउल्लाह ख़ान, ख़लील ख़ालिद, राजा राम राही एवं दशरथ सिंह के नाम शामिल हैं। पसंद किए गए कुछ अशआर निम्न हैं…
उसको मंज़िल पे पहुंचना है सफ़र से पहले
वो सफ़र के लिये निकले भी तो घर से पहले
महावीर तन्हा
ज़िंदगी के ख़ौफ़ से मरते रहे हम रोज़ ही
सरफ़रोशी ने हमें मरने पे ज़िंदा कर दिया
ज़ुबैर क़ुरैशी
किसी के दिल से किसी की नज़र से गुज़रे हैं
ख़बर नहीं हमें जाने किधर से गुज़रे हैं
चेतना शर्मा
ख़ुद से कुछ तो सवाल कर देखो.
आँख गिरे वा में डाल कर देखो,
इसमें कड़वी सी टीस निकलेगी
दिल का बर्तन खंगाल कर देखो
हसरत हयात
बने इक दिन गुरु दुनिया का भारत
ये दिल वो पल सुहाना चाहता है
जो मानवता मिटाना चाहता है
समंदर को सुखाना चाहता है
अब्दुल हमीद
वो भला क्या ही तितलियाँ देखें!
भूखे बच्चे हैं रोटियाँ देखें!!
करली मज़दूरी औऱ क्या करते!
घर को देखें या डिग्रीयाँ देखें!!
ख़लील ख़ालिद
उन की आँखों का यूं एहतराम तुम किया करो।
जब कभी नज़र मिले तो लड़खड़ा लिया करो।।
अता उल्लाह खान (अता)
कार्यक्रम का संचालन हसरत हयात द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।




