समूह की ताकत से मजदूरी छोड़ी, प्रति महीने की 35 हजार कमाई… एमए रेखा बनीं उद्यमी’।

‘समूह की ताकत से मजदूरी छोड़ी, प्रति महीने की 35 हजार कमाई… एमए रेखा बनीं उद्यमी’।
भिण्ड जिले की अटेर जनपद पंचायत के गजना ग्राम पंचायत में रहने वाली रेखा शुक्ला ने स्व-सहायता समूह ‘संगिनी आजीविका’ से जुड़कर अपनी जिंदगी बदल ली। एमए (अंग्रेजी) पास रेखा पहले आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। अब वे सेनेटरी नेपकिन और सिलाई के कारोबार से हर महीने 30-35 हजार रुपये कमा रही हैं।
*कमजोर स्थिति से शुरूआत*
समूह से जुड़ने से पहले रेखा का परिवार बेहद मुश्किल में था। पति केवल कृषि कार्य से गुजारा चला रहे थे। रेखा को दूसरों की मजदूरी करनी पड़ती थी। “परिवार चलाना सपना था, हर वक्त दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता,” रेखा ने बताया। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाना चुनौती था।
*एक लाख का लोन, दो कारोबार फले-फूले*
संगिनी समूह से एक लाख रुपये का ऋण लेकर रेखा ने कमाल कर दिखाया। उन्होंने सेनेटरी नेपकिन बनाने का काम शुरू किया, साथ ही सिलाई का धंधा भी जोड़ा। आज दोनों कारोबार जमे हुए हैं। “मजदूरी छोड़ दी। अब खुद का रोजगार है, आत्मनिर्भरता का असली मजा आया,” रेखा मुस्कुराते हुए बोलीं। महीने की 30-35 हजार कमाई से परिवार न केवल चल रहा, बल्कि बच्चों को अच्छी शिक्षा भी मिल रही है।
*परिवार-समाज में बनी मिसाल*
रेखा की सफलता से उनका परिवार समाज में सम्मानित हो गया। ग्रामीण महिलाओं के लिए वे प्रेरणा हैं। “खुशी का ठिकाना नहीं। समूह ने नई जिंदगी दी,” उन्होंने कहा।
ऐसी कहानियां ग्रामीण भारत को मजबूत बना रही हैं।




