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प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस भिंड में राष्ट्रीय संविधान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस भिंड में राष्ट्रीय संविधान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय एम.जे. एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिंड मे दिनांक 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय संविधान दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वाधान और भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत सम्मिलित रूप में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ आर. ए. शर्मा प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. राजीव कुमार जैन और प्रो. मोहित कुमार दुबे के मार्गदर्शन व निर्देशन में किया गया। सर्वप्रथम महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आर. ए. शर्मा के द्वारा राष्ट्रीय संविधान दिवस के अवसर पर संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात महाविद्यालय प्राचार्य ने संविधान दिवस के संबंध में बताया कि हमारा संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं है; यह एक ग्रंथ है, जो देश की आत्मा, उसके सपनों और उसके लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाता है। इसलिए इस दिन को पूरे देश में संविधान दिवस के रूप मे मनाया जाता है।डॉ.के. के.रायपुरिया ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया।और उसके महत्व को समझाया। प्रो.विनोद बिजोलिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि संविधान सभा में विविधता का प्रतिबिंब था। इसमें कुल 379 सदस्य थे, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, दुर्गाबाई देशमुख और हंसा मेहता जैसी महिला सदस्यों ने सक्रिय रूप से बहसों में भाग लिया और संविधान पर अपने हस्ताक्षर किए। यह उस समय की सामाजिक बनावट में एक क्रांतिकारी कदम था। प्रो. राजीव कुमार जैन ने मंच संचालन करते हुए बताया बताया भारत का संविधान किसी एक देश की नकल नहीं, बल्कि दुनिया भर के संविधानों के सर्वश्रेष्ठ सिद्धांतों का बेहद सोच-समझकर तैयार किया गया दस्तावेज है। इसमें ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार और जुडिशियल रिव्यू, आयरलैंड से राज्य के डायरेक्टिव प्रिंसिपल, कनाडा से संघीय ढांचा, जर्मनी से आपातकालीन प्रावधान और दक्षिण अफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया जैसे तत्व शामिल किए गए। प्रो.मोहित कुमार दुबे ने बताया कि संविधान 26 नवंबर, 1949 को तैयार हो गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। इसके पीछे एक गहरा ऐतिहासिक महत्व था। 26 जनवरी, 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग की थी। इस ऐतिहासिक दिन को सम्मान देने के लिए ही 26 जनवरी का दिन ‘गणतंत्र दिवस’ के रूप में चुना गया। उन्होंने बताया संविधान एक स्थिर दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह समय के साथ विकसित होता रहता है। अब तक इसमें 100 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं, जो इसे बदलती हुई सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप ढालते हैं। हालांकि, इसकी प्रस्तावना, जिसे संविधान की ‘आत्मा’ कहा जाता है, को कभी भी बदला नहीं गया है। यह ‘हम, भारत के लोग…’ से शुरू होकर देश के उद्देश्यों की घोषणा करती है। अंत में विद्यार्थियों ने संविधान दिवस के अवसर पर प्रश्न मंच प्रतियोगिता में भाग लिया। इसमें टीम ए, टीम बी टीम सी टीम डी चार टीम ने भाग लिया प्रत्येक टीम से दो दो राउंड में 10 क्वेश्चन पूछे गए जिसमें टीम बी और टीम डी चुनी गई। टीम बी विजेता हुई। विजेता टीम बी में आशीष सोनी, संचिता पाराशर श्रृष्टि यादव ,सलोनी नरवरिया, को महाविद्यालय स्टाफ प्राचार्य ने बधाई दी ।अंत में कार्यशाला का समापन राष्ट्रीय गान जन गण मन के साथ किया गया ।इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।

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