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मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी,कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति-महामंडलेश्वर रामभूषण दास जी महाराज।

मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी,कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति-महामंडलेश्वर रामभूषण दास जी महाराज।
भिण्ड जिले के अटेर क्षेत्र के ग्राम चौकी में संतोषी माता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर रामभूषण दास जी महाराज ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया। सुदामा जी जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते। पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश है। उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौङकर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते । उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सुदामा जी को सिंघासन पर बैठाकर कृष्ण जी सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा जी से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा जी विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी फूंस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं। इस लिए कहा गया है कि जब जब भक्तों पर विपदा आई है प्रभु उनका तारण करने जरुर आए हैं। अगले प्रसंग में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। तक्षक नाग आता है और राजा परीक्षित को डस लेता है। राजा परीक्षित कथा श्रवण करने के कारण भगवान के परमधाम को पहुंचते है,आज कथा के मध्य गौहद विधायक केशव देसाई,ग्वालियर से युवा भाजपा नेता पुनीत शर्मा पप्पन भैया,जिला पंचायत सीईओ सुनील दुबे,ओमप्रकाश अग्रवाल बाबूजी सहित तमाम लोगों ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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