बाहरी डब्बे वाले कृत्रिम दूध को कहें ‘ना’, मां का दूध ही शिशु का पहला सुरक्षा कवच, कलेक्टर ने किया विश्व स्तनपान सप्ताह का शुभारंभ।

बाहरी डब्बे वाले कृत्रिम दूध को कहें ‘ना’, मां का दूध ही शिशु का पहला सुरक्षा कवच, कलेक्टर ने किया विश्व स्तनपान सप्ताह का शुभारंभ।
जिला अस्पताल भिण्ड में विश्व स्तनपान सप्ताह का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कलेक्टर भिण्ड उपस्थित रहे। इस गरिमापूर्ण आयोजन में सीईओ जिला पंचायत भिण्ड, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और जिला टीकाकरण अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्तनपान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कलेक्टर भिण्ड ने नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान की अपरिहार्य उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने माताओं को जागरूक करते हुए कहा कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार और अमृत समान है। बाजार में मिलने वाले डब्बे के दूध के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने परिवारों को इसके प्रति सचेत किया और बताया कि यह नवजात के कोमल स्वास्थ्य के लिए कतई उचित नहीं है।
कलेक्टर ने माताओं को प्रेरित किया कि वे जन्म के शुरुआती 6 माह तक शिशु को पानी या बाहरी दूध जैसी कोई भी अन्य चीज न दें, क्योंकि मां का पहला गाढ़ा पीला दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार और सच्चा सुरक्षा कवच है जो उसे जीवनभर स्वस्थ और निरोगी रखता है।
सीईओ जिला पंचायत भिण्ड ने कहा कि कुपोषण और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए इस अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इस पुनीत कार्य में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक हम शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। समाज के हर वर्ग, विशेषकर परिवारों के मुखिया, वरिष्ठ महिलाएं और युवाओं को आगे आकर सभी धात्री माताओं को नियमानुसार स्तनपान के लिए प्रेरित और सहयोग करना होगा।
अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि जिला अस्पताल में आने वाली हर प्रसूता और धात्री माता को स्तनपान के सही तरीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल का नर्सिंग स्टाफ प्रसव कक्ष से लेकर वार्ड तक विशेष रूप से मुस्तैद है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का दूध अनिवार्य रूप से मिले। अस्पताल प्रबंधन संस्थागत प्रसव के साथ-साथ सुरक्षित पोषण प्रबंधन के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इसी क्रम में जिला टीकाकरण अधिकारी ने शिशु एवं बाल पोषण के मुख्य घटकों पर तकनीकी चर्चा की। उन्होंने बताया कि आईवाईसीएफ के तहत तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं, जिनमें पहली जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत करना है। दूसरी बात शुरुआती 6 महीने तक केवल और केवल स्तनपान कराना है और तीसरी बात 6 महीने पूरे होने के बाद उचित पूरक आहार के साथ-साथ दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखना है। इन घटकों का पालन करने से बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास सही ढंग से होता है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिले के सभी नागरिकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपील की। उन्होंने कहा कि वे भिण्ड जिले के हर परिवार से यह अपील करते हैं कि वे अपने घर और आस-पड़ोस में जन्म लेने वाले हर बच्चे को मां के दूध का अधिकार दिलाएं और अंधविश्वासों व डब्बे के दूध के भ्रम से दूर रहें। स्वास्थ्य विभाग की यह मुहिम तभी सार्थक होगी जब जिले का हर नागरिक इस जिम्मेदारी को समझेगा और हर माता अपने शिशु को सही समय पर सही पोषण देगी।




