प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली दबोह के शिवम को नई राह,मत्स्य पालन में पॉन्ड बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर शिवम बने सफल युवा उद्यमी

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली दबोह के शिवम को नई राह,मत्स्य पालन में पॉन्ड बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर शिवम बने सफल युवा उद्यमी
भिण्ड जिले के लहार विकासखण्ड के दबोह निवासी शिवम यादव को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से आजीविका की नई राह मिली है। कृषि में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद कृषि के क्षेत्र में स्वयं का व्यवसाय करके आत्मनिर्भर बनने की सोच से आज उनकी पहचान मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक सफल युवा उद्यमी के रूप में होने लगी है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना योजना अंतर्गत वर्ष 2026-27 में शिवम को पॉन्ड बायोफ्लॉक स्थापित करने के लिए 11 लाख 20 हजार रुपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। शिवम ने तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर दबोह में करीब 0.2 हैक्टेयर में दो पॉन्ड बायोफ्लॉक बनाकर इनमें इंडियन मेजर कार्प प्रजाति की मछलियां- कतला, रोहू, मृगल तथा पंगेशियस कैटफिश, रूपचंदा और तिलापिया का उच्च घनत्व मछली पालन शुरू किया है। इसमें उन्हें राज्य शासन के मत्स्योद्योग संचालनालय से पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिला।
शिवम बताते हैं कि उनके प्रत्येक पॉन्ड बायोफ्लाक की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब दो टन है। उनके तालाबों से निकली मछली उच्च गुणवत्ता, प्रोटीन युक्त और पूरी तरह केमिकल मुक्त होती हैं। वे अपना मत्स्य उत्पाद स्थानीय बाजार के साथ-साथ झांसी और लखनऊ में विक्रय करते हैं, तथा स्टॉक अधिक होने पर गुवाहाटी, सिलीगुड़ी और कोलकाता में भी इसकी बिक्री करते हैं। उन्हें अपने दोनों तालाबों से लगभग 4 से 5 लाख रुपए की आय हो चुकी है। शिवम भविष्य में दबोह में मत्स्य पालन की एकीकृत मूल्य श्रृंखला स्थापित करने की इच्छा रखते हैं, जिससे क्षेत्र के विकास में अधिक योगदान दे सकें।
कृषक परिवार से जुड़े शिवम मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में मिली इस सफलता में शासन से मिले सहयोग की बड़ी भूमिका बताते हैं तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हृदय से धन्यवाद देते हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का परिचय:
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य तकनीक आधारित मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है और मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाना है जिससे मत्स्य पालकों का सामाजिक और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित हो। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का लगभग 40% तथा महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजातीय वर्ग के लाभार्थियों को 60% तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है। योजना अंतर्गत पॉन्ड बायोफ्लाक उच्च-घनत्व मत्स्य पालन की आदर्श तकनीक है जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग कर पानी में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण किया जाता है। सूक्ष्मजीव ‘बायोफ्लॉक’ नाम के गुच्छे बनाते हैं, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करते हैं और पानी को साफ रखने में भी मदद करते हैं। इस पर्यावरण अनुकूल तकनीक में न्यूनतम जल संसाधन का उपयोग किया जाता है। योजना और तकनीक की अधिक जानकारी के लिए कार्यालय सहायक संचालक मत्स्योद्योग, किला परिसर, भिण्ड में सम्पर्क किया जा सकता है।




