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लोक अदालत मे 446 लंबित प्रकरणों का हुआ निराकरण, वर्षों से लंबित मुकद्में से छुटकारा पाकर लोगों के चेहरे पर खिली खुशी।

लोक अदालत मे 446 लंबित प्रकरणों का हुआ निराकरण, वर्षों से लंबित मुकद्में से छुटकारा पाकर लोगों के चेहरे पर खिली खुशी।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के आदेशानुसार नेशनल लोक अदालत का आयोजन उमेश पाण्डव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भिण्ड के निर्देशानुसार एवं मनोज कुमार तिवारी (सीनि.) विशेष न्यायाधीश / समन्वयक अधिकारी नेशनल लोक अदालत मार्गदर्शन में किया गया। नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु जिला मुख्यालय भिण्ड एवं न्यायिक तहसील मेहगांव, गोहद एवं लहार हेतु कुल 23 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया था जिनमें सुलहकर्ता सदस्य के रूप मे नामित अधिवक्तागणों द्वारा सहयोग प्रदान किया गया जिसके फलस्वरूप जिला मुख्यालय भिण्ड एवं तहसील मेहगांव, गोहद एवं लहार में लंबित कुल न्यायालयीन प्रकरण संख्या 446 प्रकरणों का निराकरण किया गया जिसमें कुल 1085 पक्षकार लाभान्वित हुए तथा राशि 1,26,69,943/(एक करोड छब्बीस लाख उनहत्तर हजार नौ सौ तैतालीस)-रूपये का अवार्ड पारित किया गया। उक्त प्रकरणों के अतिरिक्त प्रीलिटिगेशन जिनमें जलकर सम्पत्तिकर, विद्युत बी.एस.एन.एल, बैंक आदि के कुल प्रीलिटिगेशन प्रकरण संख्या 1013 का निराकरण किया गया, जिसमें 1023 व्यक्तियों को लाभांवित किया गया तथा उक्त प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में कुल 1,26,24,264 /-रूपये ( एक करोड छब्बीस लाख चौबीस हजार दौ सौ चौसठ रूपये)राशि वसूल की गई।
वर्ष 2025 की प्रथम नेशनल लोक अदालत में गठित खण्डपीठो द्वारा कई मामलो में पक्षकारो के मध्य आपसी कटुता को समाप्त करते हुये दोनो पक्षो को मिलाने का कार्य किया गया तथा सफल प्रकरणों में पक्षकारो को पौधे भेट कर उन्हे जीवन में विवाद को समाप्त करने तथा शांतिपूर्वक सुखी एवं समृद्ध जीवन व्यतीत करने की सलाह भी दी गयी।
लोक अदालत में खण्डपीठ क्र. 4 के पीठासीन अधिकारी दिनेश कुमार खटीक, जिला न्यायाधीश भिण्ड के न्यायालय में अपील में चल रहे एक प्रकरण जिसमें शहर भिण्ड कस्बा निवासी अपीलार्थी बैजनाथ प्रसाद उम्र- 82 वर्ष, ने 45 वर्ष पहले अपने मकान को प्रतिवादिया दिव्या श्रीवास्तव के ससुर को किराये पर दिया था जिसमें विद्यालय संचालित हो रहा है। अपीलार्थी द्वारा विचारण न्यायालय में इस बावत् परिवाद दायर किया गया था कि उनकी संतान को उक्त किराए पर दिए हुए मकान की आवश्यकता है। विचारण न्यायालय द्वारा उनके प्रकरण में प्रतिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। जिसके विरूद्ध बैजनाथ प्रसाद ने अपील न्यायालय में दायर की थी। उक्त प्रकरण में दोनों पक्षों को बुलाकर पीठासीन अधिकारी द्वारा समझाइश दी गई कि पक्षकारगण अपने आपसी मदभेदों को भुलाकर आज लोक अदालत में अपने वर्षों से चले आ रहे प्रकरण को हमेशा के लिए समाप्त करंे। उक्त समझाइश के उपरांत दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुए कि प्रतिवादिया तीन महीने के भीतर किराए के मकान को उसके मालिक श्री बैजनाथ प्रसाद को सौंपेगी। इस प्रकार वर्षों से चले आ रहे प्रकरण का राजीनामा से अंत हुआ तथा त्वरित एवं सुलभ न्याय की संकल्पना को सभी के सामूहिक प्रयासों से मूर्त रूप दिया तथा पक्षकारगणों को प्रकरण के निराकरण के फलस्वरूप भेंट के तौर पर फलदार वृक्ष उमेश पाण्डव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष द्वारा प्रदत्त किया गया तथा उनके एवं उनके परिवार की खुशहाली की शुभकामनाए देते हुए खुशी-खुशी उन्हें विदा किया।

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