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कृषि विज्ञान केंद्र लहार में आयोजित हुई प्राकृतिक खेती कार्यशाला, 200 से अधिक कृषकों ने लिया जैविक कार्यशाला सेमिनार का लाभ।

कृषि विज्ञान केंद्र लहार में आयोजित हुई प्राकृतिक खेती कार्यशाला, 200 से अधिक कृषकों ने लिया जैविक कार्यशाला सेमिनार का लाभ।

दिनांक 19 6.2026 को परियोजना संचालक आत्मा किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग जिला भिण्ड द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्य प्रदेश की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु विशेष अभियान अंतर्गत प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र लहार में किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट विशिष्ट अतिथियों द्वारा सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लहार द्वारा एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सुभाष अग्निहोत्री विधायक प्रतिनिधि एवं मंडल अध्यक्ष भाजपा लहार, विशिष्ट अतिथि रणवीर सिंह राठौड़ भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष लहार , डॉ एस पी सिंह प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र लहार के द्वारा की गई।
प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन एवं विस्तार हेतु चल रहे हैं विभिन्न योजनाओं की जानकारी एवं प्राकृतिक खेती का महत्व के बारे में डॉक्टर एसपी सिंह प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र लहार के द्वारा बताया गया तथा रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों, जीवामृत, घन जीवामृत, आग्नेयास्त्र, नीमास्त्र, के बारे में नोडल प्राकृतिक कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बी पी एस रघुवंशी द्वारा विस्तार से प्राकृतिक खेती इच्छुक कृषकों को बताया गया। प्राकृतिक खेती के विभिन्न सफल मॉडल अपनाए जाने हेतु आधारित विस्तृत चर्चा एवं प्रगतिशील कृषक गुरु प्रसन्न सिंह राजावत बड़ागांव, दिनेश द्विवेदी अखदेवा, गंगाराम बघेल लहार, सुगम कुशवाह अमाहा, राजा परिहार शाहपुरा, देवकीनन्दन कुशवाह लोटमपुरा, महेश समाधिया उदोतपुरा, जितेंद्र कौरव गेंथरी, के द्वारा अपने प्राकृतिक खेती के अनुभव, बायो इनपुट एवं लाभ के बारे में कृषकों से परिचर्चा की ।
*आज नहीं तो कल पुनः लौटना होगा प्राकृतिक कृषि की ओर – एसडीएम लहार*
कार्यशाला में अनुविभागीय की दंडाधिकारी विजय सिंह यादव ने किसानों से चर्चा करते हुए उन्हें मृदा के स्वास्थ्य, रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभाव ,मृदा कार्ड की उपयोगिता, कंपोस्ट केंचुआ खाद का प्रयोग, कृषि के साथ-साथ पशुपालन से अतिरिक्त लाभ के स्रोत, परंपरागत कृषि के साथ वैज्ञानिक अवधारणा का समायोजन इत्यादि बिंदुओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए क्षेत्र के कृषकों से अनुरोध किया है कि वह प्राकृतिक कृषि का प्रयोग करते हुए नहीं केवल फसल उत्पादन से बेहतर लाभ प्राप्त करेंगे बल्कि यह बिंदु सीधा सामाजिक और राष्ट्र के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है रासायनिक उर्वरकों की उपयोग से जहां एक और मृदा की प्राकृतिक क्षमता तो समाप्त हो ही रही है तो वहीं दूसरी ओर सरकार पर भी प्रतिवर्ष अरबो रुपए का आर्थिक बोझ आता है जो पैसा देश के विकास में लगना चाहिए वह हानिकारक रासायनिक खाद के सैलाब में बह जाता है।

*कृषक गंगाराम बघेल एवं गुरु प्रसंग राजावत ने बताई प्राकृतिक कृषि से लाभ की स्वयं की सफलता की कहानी*
यद्यपि लहार अनुभाग के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से एक दर्जन से अधिक किसान आज प्राकृतिक कृषि के गुण सीख कर अपने आर्थिक स्तर में बदलाव लाने में पूर्णता सफल हुए हैं इसी क्रम में कार्यशाला में उपस्थित किसान गुरु प्रसन्न राजावत एवं गंगाराम बघेल जो ना ही केवल संभाग स्तर से लेकर आज केंद्र स्तर तक से सम्मान प्राप्त कर चुके हैं दोनों किसान आज प्राकृतिक कृषि से मात्र 5 से 15 बीघा कृषि भूमि का उपयोग करते हुए वार्षिक टर्नओवर 8 लाख से 15 लाख तक वार्षिक प्राप्त कर रहे हैं

 

कार्यशाला में FPO के संचालक कृष्णबिहारी लाल श्रीवास्तव लहार द्वारा FPO के सहयोग की जानकारी दी गई। कार्यशाला में कृषि विभाग, उद्यान, पंचायत एवं ग्रामीण, आजीविका मिशन, जन अभियान परिषद, पशुपालन, राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारीगण उपस्थित रहे। साथ ही कार्यक्रम के अंत में उपस्थित समस्त कृषकों के लिए दोपहर के भोजन की भी व्यवस्था कृषि विज्ञान केंद्र में रखी गई थी कार्यक्रम के अंत में कार्यशाला का संचालन धन्यवाद् प्रस्ताव एवं समापन विष्णु शर्मा कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किया गया।

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