आदर्श आंगनवाड़ी के रूप में विकसित हो रही गोहद की आंगनवाड़ियां,सुपर 50 कार्यक्रम के तहत हो रहा आंगनवाड़ी भवन का जीर्णोद्धार।

आदर्श आंगनवाड़ी के रूप में विकसित हो रही गोहद की आंगनवाड़ियां,सुपर 50 कार्यक्रम के तहत हो रहा आंगनवाड़ी भवन का जीर्णोद्धार।
*कौशल विकास, मशरूम की खेती, फलदार पौधों और कड़कनाथ चूजों से बनेंगी महिलाएं और किशोरियां आत्मनिर्भर*
*कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए फूड बास्केट की गई तैयार*
*मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों के सीएसआर फंड से मिल रहा वित्तपोषण*
आकांक्षी विकासखंड गोहद के अंतर्गत गोहद परियोजना की 340 आंगनवाड़ी और मौ परियोजना की 110 आंगनवाड़ियों को आदर्श आंगनवाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। आंगनवाड़ियों के वित्तपोषण में विभागीय बजट के अतिरिक्त मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाइयों के सीएसआर फंड का भी समुचित उपयोग कर भौतिक सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। कंपनियों को गत 3 वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का न्यूनतम 2% हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होता है। जिला प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग की पहल पर मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों की सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से गोहद विकासखंड की आंगनवाड़ियों के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
*आदर्श आंगनवाड़ी का सुपर 50 कार्यक्रम*
पायलट के तौर पर आंगनवाड़ियों के उन्नयन के लिए सुपर-50 कार्यक्रम पर काम किया जा रहा है, जिसमें चिह्नित 50 आंगनवाड़ियों में भवन की मरम्मत, उन्नयन, और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य शासन की ‘अडाप्ट एन आंगनवाड़ी’ पहल अंतर्गत सुपर 50 कार्यक्रम के तहत एसआरएफ फाउंडेशन के सहयोग से कुल 13 आंगनवाड़ी, फ्यूजन फाइनेंस और टेवा फार्मास्युटिकल इंडिया लिमिटेड के सीएसआर योगदान से एक-एक आंगनवाड़ी में भौतिक अधोसंरचना का विकास किया गया है। इन औद्योगिक इकाइयों द्वारा आंगनवाड़ी के भवन का प्लास्टर और रंग-रोगन कर जीर्णोद्धार किया गया तथा भवनों को आकर्षक वॉल पेंटिंग के माध्यम बच्चों के लिए रोचक वातावरण निर्मित किया गया है। एसआरएफ फाउंडेशन ने आंगनवाड़ियों के लिए अलमारी, पुस्तकें और खिलौने प्रदान किए हैं। फ्यूजन फाइनेंस ने घनश्यामपुरा वार्ड नंबर 1 के आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए खिलौने और टेवा फार्मास्युटिकल इंडिया लिमिटेड ने सिंघवारी आंगनवाड़ी के लिए कूलर, एलईडी टीवी, सीसीटीवी कैमरे, झूले और फिसलपट्टी उपलब्ध कराए हैं। परियोजना की दो आंगनवाड़ियों का उन्नयन जनजातीय कार्य विभाग से प्राप्त बजट के माध्यम से किया गया है। शेष आंगनवाड़ियों के उन्नयन का कार्य प्रगतिरत है जिसके आगामी 6 माह में पूर्ण होने का लक्ष्य है। राज्य शासन द्वारा 25 आंगनवाड़ियों में पानी के आरओ फिल्टर और एलईडी टीवी उपलब्ध करवाए गए हैं, इन सुविधाओं को अतिरिक्त आंगनवाड़ियों में उपलब्ध करवाने के लिए प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। नई शिक्षा नीति के तहत आंगनवाड़ी में प्री-स्कूल शिक्षा के लिए गोहद और मौ परियोजनाओं की दो सुपरवाइजर और दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एसआरएफ फाउंडेशन के सहयोग से नूह, हरियाणा में एक्सपोजर विजिट करवाई गई है और कुल 30 सुपरवाइजर व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-स्कूल शिक्षा में नियमित अंतराल पर प्रशिक्षित किया जाता है।
*पूरक पोषण आहार की व्यवस्था*
आंगनवाड़ी के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए शासन द्वारा प्राप्त हो रहे टेक होम राशन के अतिरिक्त पूरक पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत संसाधन और उद्योगों के योगदान से एनआरसी में भर्ती कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए फूड बास्केट तैयार की गई है, जिसमें मोरिंगा पाउडर, सत्तू, आमला कैंडी, चना, गुड़ और मूंगफली जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ रखे गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के इस प्रयास को मापने के लिए प्रत्येक माह ऐसे बच्चों का वजन जांचा जाएगा।
*आत्मनिर्भरता की लाड़ली समृद्ध ग्राम योजना*
आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाली किशोरी बालिकाओं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा पायलट के तौर पर लाड़ली समृद्ध ग्राम योजना बनाई गई है। गुरीखा के जनजातीय बाहुल्य आदिवासीपुरा आंगनवाड़ी में महिलाओं के लिए सिलाई मशीन का प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। सिलाई कार्य के अलावा केंद्र में अचार, मुरब्बा और चटाई बनाना सिखाया जाएगा। केंद्र में ऑयस्टर प्रजाति का मशरूम कल्चर विकसित किया जा रहा है, जिससे लगभग 23 प्रतिशत प्रोटीन प्राप्त होगा। ग्राम गुरीखा में जनजातीय समुदाय के सभी 13 परिवारों को निजी तौर पर 5-5 पंचरत्न पेड़ दिए जा रहे हैं, जिनमें आंवला, जामुन, जामफल, मोरिंगा (सहजन) और नींबू शामिल हैं। पशुपालन विभाग से समन्वय कर इन परिवारों को प्रत्येक 40 कड़कनाथ के चूजे दिए जाएंगे, 2.5 महीने बाद ही बाजार में इसकी कीमत लगभग 1200 रुपये होती है। कौशल विकास, मशरूम की खेती, फलदार पौधों और कड़कनाथ चूजों के माध्यम से समुदाय का आर्थिक सशक्तिकरण और स्वास्थ्यवर्धन दोनों सुनिश्चित किया जा रहा है। इस पायलट को आगे सहारिया जनजातीय बाहुल्य अन्य 3 ग्राम- मातादीन का पुरा, आशाराम का पुरा और रडी का पुरा की आंगनवाड़ियों में भी लागू किया जाएगा।




