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सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय इत्यादि मूलभूत सुविधाओं की रहे पुख्ता व्यवस्था – डॉ. निवेदिता शर्मा।

सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय इत्यादि मूलभूत सुविधाओं की रहे पुख्ता व्यवस्था – डॉ. निवेदिता शर्मा।

*बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने जिला स्तरीय समन्वय बैठक में दिए निर्देश*

*बाल अधिकार, बाल संरक्षण व्यवस्थाओं एवं शासकीय व अशासकीय बाल देख-रेख संस्थाओं की गतिविधियों की हुई समीक्षा*

ऐसे सपोर्ट पर्सन जिनको मानदेय चाहिए, वो कभी सपोर्ट पर्सन नहीं बन सकते। सपोर्ट पर्सन का मापदंड यह है कि बच्चे को सहज महसूस होना चाहिए। इस आशय के निर्देश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने दिए। वे बुधवार को जिला पंचायत भिण्ड के सभागार में जिला स्तरीय समन्वय बैठक में बाल अधिकारों, बाल संरक्षण व्यवस्थाओं एवं शासकीय व अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा कर रहीं थीं।
बैठक में जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यगण, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यगण, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित स्कूल शिक्षा, सामाजिक न्याय व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने जोर देकर कहा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण हर हाल में 24 घंटे के भीतर जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत हो जाना चाहिए। पुलिस अधिकारी इस काम को गंभीरता से लें। उन्होंने पॉक्सो एक्ट से संबंधित प्रकरणों के लिये पर्याप्त सपोर्ट पर्सन नियुक्त करने के निर्देश जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास को दिए। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा-4, 5 व 6 में दर्ज प्रत्येक प्रकरण में सपोर्ट पर्सन की व्यवस्था हर हाल में होना चाहिए।

बाल संरक्षण संस्थाओं में निवासरत सभी बच्चों की नियमित हैल्थ व सुरक्षा ऑडिट करने पर भी बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष में विशेष बल दिया। उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय इत्यादि मूलभूत सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने बाल श्रम को रोकने के लिये प्रभावी कदम उठाने निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि सुनने में असमर्थ 6 वर्ष तक के बच्चों को स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के सहयोग से चिन्हित करें और सरकार के खर्चे पर उनके कानों में कोक्लियर इम्प्लांट लगवाएं।

जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा में संचालित हॉस्टलों की समीक्षा की गई और बालिका छात्रावासों के संबंध में विशेष सुरक्षा के निर्देश दिए गए। साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता पर आवश्यक व्यवस्थाओं के निर्देश दिए गए, छात्रावासों का संचालन निर्धारित प्रोटोकॉल अनुसार ही होना चाहिए, संचालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में पॉस्को अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल विवाह निषेध, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत वंचित वर्ग के बच्चों का स्कूलों में प्रवेश, बच्चों के पोषण की स्थिति, गुमशुदा, शोषित व जोखिमग्रस्त एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, पुनर्वास एवं बाल देखरेख संस्थाओं, स्कूल शिक्षा व जनजाति कल्याण विभाग के छात्रावासों की व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग भिण्ड ने सभी विभागों के अधिकारियों को बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों का समयबद्ध कार्यक्रम के तहत पालन करने आग्रह किया।

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