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ग्रामीण आजीविका मिशन ने छींमका निवासी रेखा को बनाया आत्मनिर्भर,किराना दुकान संचालित कर बनीं लखपति

ग्रामीण आजीविका मिशन ने छींमका निवासी रेखा को बनाया आत्मनिर्भर,किराना दुकान संचालित कर बनीं लखपति।भिण्ड जिले के विकासखंड गोहद की छींमका निवासी  रेखा चौहान के जीवन में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन आया है। आसान शर्तों पर बैंक से मिले ऋण की बदौलत वे बरी और किराना व्यवसाय शुरू कर लखपति दीदी बन चुकी हैं।संतोषी माता स्वसहायता समूह की अध्यक्ष रेखा चौहान बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़कर उन्हें परिक्रामी निधि (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के रूप में रियायती ब्याज दरों पर ऋण मिला। उन्होंने पूर्व में डेढ़ लाख रुपए और तीन लाख रुपए का बैंक से ऋण लिया, जिसे चुकाने पर अब वर्तमान में छह लाख रुपए का ऋण चल रहा है। इसी राशि से उन्होंने वर्ष 2019 में बरी बनाने का व्यवसाय शुरू किया था, जिससे छोटी-छोटी बचत कर अपने घर पर ही खुद की किराने की दुकान भी खोल ली है। उन्होंने बताया कि किराना दुकान से प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के कारण वे पति के निधन के बाद भी अपनी संतान और बुजुर्ग ससुर की सभी जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभा पा रही हैं। रेखा चौहान बताती हैं कि संतोषी माता स्वसहायता समूह से जुड़ी अन्य महिलाएं सिलाई, पशुपालन, किराना दुकान जैसी आजीविका चलाती हैं, और सभी लखपति दीदी बन गई हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर गांव में महिला सशक्तिकरण को बल मिला है। वे इस योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को धन्यवाद देती हैं।

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