आत्मनिर्भरता की ओर ग्राम छीमका की स्वसहायता समूहों की दीदियों के बढ़ते कदम,18 स्वसहायता समूहों से जुड़कर हैं 198 दीदियां बनीं लखपति

आत्मनिर्भरता की ओर ग्राम छीमका की स्वसहायता समूहों की दीदियों के बढ़ते कदम,18 स्वसहायता समूहों से जुड़कर हैं 198 दीदियां बनीं लखपति
*छीमका में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से महिला आत्मनिर्भरता सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बनी*
भिण्ड जिले के विकासखण्ड गोहद के ग्राम छीमका की स्व सहायता समूह (SHG) से जुड़ी दीदियां अब आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहारे छोटी-छोटी बचत से शुरू हुई यह यात्रा आज सामूहिक उद्यम और बैंक लिंकेज के माध्यम से सफलता की नई मिसाल बन चुकी हैं। छीमका में 18 विभिन्न स्वसहायता समूहों से जुड़कर 198 दीदियां लखपति बनीं हैं, जिससे गांव का आर्थिक परिदृश्य बदला है।
*दीदियों का संकल्प: बचत से शुरू हुआ सफर*
छीमका गांव की महिलाओं ने पहले छोटी रकम की मासिक बचत से स्व सहायता समूह बनाया। शुरुआत में 50–100 रुपये प्रति माह की बचत करने वाली इन दीदियों ने धीरे-धीरे समूह को मजबूत किया और बैंक से ऋण लिंकेज जुड़वाया। डे-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के माध्यम से इन समूहों को प्रशिक्षण, बाजार लिंकेज और वित्तीय सहायता प्रदान की गई। समूहों को परिक्रामी निधि (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के रूप में रियायती ब्याज दरों पर पूंजी उपलब्ध कराई गई, जिससे दीदियों ने सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, ब्यूटी पार्लर, कृषि, पशु पालन और गृह उद्योग जैसे व्यवसाय शुरू किए।
*सामूहिक ताकत से बढ़ा आत्मविश्वास*
समूह में जुड़ने के बाद दीदियों का आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति दोनों मजबूत हुई। अब वे न केवल अपने परिवार की आय में योगदान देती हैं, बल्कि गांव के विकास कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। ‘लखपति दीदी’ बन चुकी दीदियां ग्राम की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं हैं।
*आजीविका शुरू करने में मिला सहारा* रेखा ने संतोषी माता स्व-सहायता समूह से जुड़कर किराना दुकान, पार्वती ने संतोषी माता स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई कार्य, सरिता ने जय भीम स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई और कृषि कार्य, कमला ने बीजासेन स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई कार्य तथा जलदेवी ने जय भोले बाबा स्व-सहायता समूह से जुड़कर ब्यूटी पार्लर कार्य शुरू कर आत्मनिर्भरता की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए सहयोग और ऋण की सुविधा मिली।
समूह की दीदियों ने बताया कि उनके व्यवसाय से नियमित आय हो रही है जिससे वे बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतों और घरेलू खर्चों को पूरा कर पा रही हैं। वे समय पर ऋण की किस्तों का भुगतान कर रही हैं। स्व-सहायता समूह ने उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत किया है। आज वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर यह सीखा कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकते हैं। आज वे सभी अपने व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के साथ स्वयं को आत्मनिर्भर महसूस कर रही हैं। उन्होंने जन कल्याणकारी योजनाओ के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
ग्राम छीमका की यह दास्तां साबित करती है कि डे-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर जब ग्रामीण महिलाएं एकजुट होती हैं, तो आत्मनिर्भरता सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन जाती है।




