उर्दू सिर्फ भाषा नहीं, तहज़ीब और मोहब्बत की विरासत हैं :- हसरत हयात

उर्दू सिर्फ भाषा नहीं, तहज़ीब और मोहब्बत की विरासत हैं :- हसरत हयात
उर्दू अकादमी को जन-जन से जोड़ने के लिए जिला उर्दू समन्वयक ने दिए अभिनव सुझाव।
भिण्ड। उर्दू महज एक भाषा नहीं, बल्कि सदियों से हिंदुस्तान की साझा संस्कृति, भाईचारे, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत पहचान रही है। इसी भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उर्दू अदब को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से जिला उर्दू समन्वयक भिण्ड हसरत हयात ने मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की डायरेक्टर डॉ. नुसरत मेंहदी भोपाल के समक्ष कई महत्वपूर्ण और रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए हैं। हयात ने सुझाव दिया कि जिला स्तर पर उर्दू समन्वयकों को कलेक्ट्रेट, पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जाने वाले जन-जागरूकता अभियानों से जोड़ा जाए। स्वच्छता, साक्षरता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियानों में उर्दू समन्वयकों की सहभागिता से भाषा के साथ-साथ सामाजिक सरोकार भी मजबूत होंगे।उन्होंने अंतर-सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न धर्मों और समाजों के प्रमुख त्योहारों पर छोटी-छोटी अदबी नशिस्तों और (काव्य गोष्ठियों) के आयोजन का सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि जब उर्दू की महफिलों में हर समाज की आवाज शामिल होगी, तभी भाषा की असली खूबसूरती और उसकी साझी विरासत सामने आएगी।
नई पीढ़ी को अदब से जोड़ने की पहल..
हसरत हयात ने उभरते रचनाकारों को उर्दू शायरी की बारीकियों से जोड़ने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से 6-7 माह की नि:शुल्क ‘फिल-बदीह’ डिजिटल ग़ज़ल प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू करने का सुझाव दिया है। वरिष्ठ उस्ताद शायरों के मार्गदर्शन में अरूज़ और ग़ज़ल की बुनियादी जानकारी देने के साथ प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाण-पत्र दिए जाने का प्रस्ताव है।इस पहल को बिना अतिरिक्त वित्तीय भार के नई पीढ़ी तक उर्दू अदब पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया गया है। डिजिटल दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़ी युवा पीढ़ी को यदि साहित्य और शायरी से जोड़ा जाए तो उर्दू के प्रति रुचि को नई दिशा मिल सकती है। हयात का कहना है कि उर्दू को किसी एक वर्ग की भाषा तक सीमित करने के बजाय इसे हर दिल तक पहुंचाने की जरूरत है। सरकारी अभियानों, सामाजिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और डिजिटल माध्यमों के जरिए उर्दू को जन-जन से जोड़ना ही इस खूबसूरत भाषा के भविष्य को मजबूत कर सकता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि इन सुझावों पर सकारात्मक पहल होने से प्रदेश में उर्दू अकादमी की गतिविधियां और अधिक प्रभावी एवं सर्वसमावेशी होंगी तथा जिला उर्दू समन्वयकों को भी समाज और प्रशासन के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
“उर्दू की तरक्की सिर्फ अल्फाजों की तरक्की नहीं, बल्कि मोहब्बत, भाईचारे और साझा तहज़ीब को मजबूत करने की कोशिश है।”
— हसरत हयात, जिला उर्दू समन्वयक, भिंड।




